Singer: Sudha Malhotra
सलाम-ए-हसरत क़बूल कर लो
मेरी मुहब्बत क़बूल कर लो
उदास नज़रें तड़प तड़प कर
तुम्हारे जलवों को ढूँढ़ती हैं
जो ख़्वाब की तरह खो गये
उन हसीन लम्हों को ढूँढ़ती हैं
अगर न हो नागवार तुमको
तो ये शिक़ायत क़बूल कर लो
तुम्हीं निगाहों की जुस्तजू हो
तुम्हीं खयालों का मुद्दा हो
तुम्हीं मेरे वास्ते सनम हो
तुम्हीं मेरे वास्ते ख़ुदा हो
मेरी परस्तिश की लाज रख लो
मेरी इबादत क़बूल कर लो
तुम्हारी झुकती नज़र से जब तक
न कोई पैग़ाम मिल सकेगा
न रूह तस्क़ीन पा सकेगी
न दिल को आराम मिल सकेगा
ग़म-ए-जुदाई है जान लेवा
ये इक हक़ीकत क़बूल कर लो
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Sunday, March 6, 2011
Sunday, October 31, 2010
तुम मुझे भूल भी जाओ तो ये हक़ है तुमको
Singers: Sudha Malhotra and Mukesh
तुम मुझे भूल भी जाओ तो ये हक़ है तुमको
मेरी बात और है मैंने तो मुहब्बत की है
मेरे दिल की मेरे जज़बात की क़ीमत क्या है
उलझे-उलझे से ख़्यालात की क़ीमत क्या है
मैंने क्यूं प्यार किया तुमने न क्यूं प्यार किया
इन परेशान सवालात की कीमत क्या है
तुम जो ये भी न बताओ तो ये हक़ है तुमको
मेरी बात और है मैंने तो मुहब्बत की है
ज़िन्दगी सिर्फ़ मुहब्बत नहीं कुछ और भी है
ज़ुल्फ़-ओ-रुख़सार की जन्नत नहीं कुछ और भी है
भूख और प्यास की मारी हुई इस दुनिया में
इश्क़ ही एक हक़ीकत नहीं कुछ और भी है
तुम अगर आँख चुराओ तो ये हक़ है तुमको
मैंने तुमसे ही नहीं सबसे मुहब्बत की है
तुमको दुनिया के ग़म-ओ-दर्द से फ़ुरसत ना सही
सबसे उलफ़त सही मुझसे ही मुहब्बत ना सही
मैं तुम्हारी हूँ यही मेरे लिये क्या कम है
तुम मेरे होके रहो ये मेरी क़िस्मत ना सही
और भी दिल को जलाओ तो ये हक़ है तुमको
मेरी बात और है मैंने तो मुहब्बत की है
तुम मुझे भूल भी जाओ तो ये हक़ है तुमको
मेरी बात और है मैंने तो मुहब्बत की है
मेरे दिल की मेरे जज़बात की क़ीमत क्या है
उलझे-उलझे से ख़्यालात की क़ीमत क्या है
मैंने क्यूं प्यार किया तुमने न क्यूं प्यार किया
इन परेशान सवालात की कीमत क्या है
तुम जो ये भी न बताओ तो ये हक़ है तुमको
मेरी बात और है मैंने तो मुहब्बत की है
ज़िन्दगी सिर्फ़ मुहब्बत नहीं कुछ और भी है
ज़ुल्फ़-ओ-रुख़सार की जन्नत नहीं कुछ और भी है
भूख और प्यास की मारी हुई इस दुनिया में
इश्क़ ही एक हक़ीकत नहीं कुछ और भी है
तुम अगर आँख चुराओ तो ये हक़ है तुमको
मैंने तुमसे ही नहीं सबसे मुहब्बत की है
तुमको दुनिया के ग़म-ओ-दर्द से फ़ुरसत ना सही
सबसे उलफ़त सही मुझसे ही मुहब्बत ना सही
मैं तुम्हारी हूँ यही मेरे लिये क्या कम है
तुम मेरे होके रहो ये मेरी क़िस्मत ना सही
और भी दिल को जलाओ तो ये हक़ है तुमको
मेरी बात और है मैंने तो मुहब्बत की है
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