Singer: Ghulam Ali
ऐ हुस्न-ए-बेपरवाह तुझे शबनम कहूँ शोला कहूँ
फूलों में भी शोख़ी तो है किसको मगर तुझसा कहूँ
गेसू उड़े महकी फ़ज़ा जादू करें आँखें तेरी
सोया हुआ मंज़र कहूँ या जागता सपना कहूँ
चंदा की तू है चाँदनी लहरों की तू है रागिनी
जान-ए-तमन्ना मैं तुझे क्या क्या कहूँ क्या ना कहूँ
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Sunday, October 31, 2010
Sunday, October 24, 2010
इक दिया दिल में जलाना भी बुझा भी देना
Singer: Ghulam Ali
इक दिया दिल में जलाना भी बुझा भी देना
याद करना भी उसे रोज़ भुला भी देना
क्या कहूँ यह मेरी चाहत है के नफरत उसकी
नाम लिखना भी मेरा लिख के मिटा भी देना
खत भी लिखना उसे मायूस भी रहना उससे
जुर्म करना भी मगर खुद को सज़ा भी देना
उससे मनसूब भी कर लेना पुराने किस्से
उसके बालों में नया फूल सजा भी देना
इक दिया दिल में जलाना भी बुझा भी देना
याद करना भी उसे रोज़ भुला भी देना
क्या कहूँ यह मेरी चाहत है के नफरत उसकी
नाम लिखना भी मेरा लिख के मिटा भी देना
खत भी लिखना उसे मायूस भी रहना उससे
जुर्म करना भी मगर खुद को सज़ा भी देना
उससे मनसूब भी कर लेना पुराने किस्से
उसके बालों में नया फूल सजा भी देना
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