Singer: Bhupinder
ज़िंदगी फूलों की नहीं, फूलों की तरह महकी रहे
ज़िंदगी भूलों की नहीं, फूलों की तरह महकी रहे
जब कोई कहीं गुल खिलता है, आवाज़ नहीं आती लेकिन
ख़ुशबू की खबर आ जाती है, ख़ुशबू महकी रहे
जब राह कहीं कोई मुड़ती है, मंज़िल का पता तो होता नहीं
इक राह पे राह मिल जाती है, राहें मुड़ती रहें
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Sunday, March 6, 2011
ज़िन्दगी में जब तुम्हारे ग़म नहीं थे
Singers: Bhupinder and Anuradha Paudwal
ज़िन्दगी में जब तुम्हारे ग़म नहीं थे
इतने तनहा थे कि हम भी हम नहीं थे
वक़्त पर जो लोग काम आए हैं अक्सर
अजनबी थे, वो मेरे हमदम नहीं थे
बेसबब था तेरा मिलना रहगुज़र में
हादसे हर मोड़ पर कुछ कम नहीं थे
हमने ख़्वाबों में ख़ुदा बनकर भी देखा
आप थे, बाहों में दो आलम नहीं थे
सामने दीवार थी ख़ुद्दारियों की
वरना रस्ते प्यार के पुरख़म नहीं थे
ज़िन्दगी में जब तुम्हारे ग़म नहीं थे
इतने तनहा थे कि हम भी हम नहीं थे
वक़्त पर जो लोग काम आए हैं अक्सर
अजनबी थे, वो मेरे हमदम नहीं थे
बेसबब था तेरा मिलना रहगुज़र में
हादसे हर मोड़ पर कुछ कम नहीं थे
हमने ख़्वाबों में ख़ुदा बनकर भी देखा
आप थे, बाहों में दो आलम नहीं थे
सामने दीवार थी ख़ुद्दारियों की
वरना रस्ते प्यार के पुरख़म नहीं थे
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Sunday, January 2, 2011
करोगे याद तो हर बात याद आयेगी
Singer: Bhupinder
करोगे याद तो हर बात याद आयेगी
गुज़रते वक़्त की हर मौज ठहर जायेगी
ये चाँद बीते ज़मानों का आईना होगा
भटकते अब्र में चहरा कोई बना होगा
उदास राह कोई दास्तां सुनाएगी
बरसता-भीगता मौसम धुआँ-धुआँ होगा
पिघलती शमों पे दिल का मेरे ग़ुमां होगा
हथेलियों की हिना याद कुछ दिलायेगी
गली के मोड़ पे, सूना सा कोई दरवाज़ा
तरसती आँखों से रस्ता किसी का देखेगा
निगाह दूर तलक जा के लौट आएगी
करोगे याद तो हर बात याद आयेगी
गुज़रते वक़्त की हर मौज ठहर जायेगी
ये चाँद बीते ज़मानों का आईना होगा
भटकते अब्र में चहरा कोई बना होगा
उदास राह कोई दास्तां सुनाएगी
बरसता-भीगता मौसम धुआँ-धुआँ होगा
पिघलती शमों पे दिल का मेरे ग़ुमां होगा
हथेलियों की हिना याद कुछ दिलायेगी
गली के मोड़ पे, सूना सा कोई दरवाज़ा
तरसती आँखों से रस्ता किसी का देखेगा
निगाह दूर तलक जा के लौट आएगी
Tuesday, October 26, 2010
किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है
Singers: Bhupinder and Asha Bhosle
किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है
कहाँ हो तुम कि ये दिल बेक़रार आज भी है
वो वादियाँ वो फ़ज़ायें कि हम मिले थे जहाँ
मेरी वफ़ा का वहीं पर मज़ार आज भी है
न जाने देख के क्यों उनको ये हुआ एहसास
कि मेरे दिल पे उन्हें इख्तियार आज भी है
वो प्यार जिस के लिये हमने छोड़ दी दुनिया
वफ़ा की राह पे घायल वो प्यार आज भी है
यकीं नहीं है मगर आज भी ये लगता है
मेरी तलाश में शायद बहार आज भी है
न पूछ कितने मोहब्बत के ज़ख्म खाये हैं
कि जिन को सोच के दिल सोग़वार आज भी है
किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है
कहाँ हो तुम कि ये दिल बेक़रार आज भी है
वो वादियाँ वो फ़ज़ायें कि हम मिले थे जहाँ
मेरी वफ़ा का वहीं पर मज़ार आज भी है
न जाने देख के क्यों उनको ये हुआ एहसास
कि मेरे दिल पे उन्हें इख्तियार आज भी है
वो प्यार जिस के लिये हमने छोड़ दी दुनिया
वफ़ा की राह पे घायल वो प्यार आज भी है
यकीं नहीं है मगर आज भी ये लगता है
मेरी तलाश में शायद बहार आज भी है
न पूछ कितने मोहब्बत के ज़ख्म खाये हैं
कि जिन को सोच के दिल सोग़वार आज भी है
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