Singer: Jagjit Singh
हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से लम्हें नहीं तोड़ा करते
जिस की आवाज़ में सिलवट हो निगाहों में शिकन
ऐसी तस्वीर के टुकड़े नहीं जोड़ा करते
शहद जीने का मिला करता है थोड़ा थोड़ा
जाने वालों के लिये दिल नहीं थोड़ा करते
लग के साहिल से जो बहता है उसे बहने दो
ऐसे दरिया का कभी रुख़ नहीं मोड़ा करते
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Sunday, November 21, 2010
हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा
Singer: Jagjit Singh
हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा
मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समंदर मेरा
एक से हो गए मौसमों के चेहरे सारे
मेरी आँखों से कहीं खो गया मंज़र मेरा
किससे पूछूँ कि कहाँ गुम हूँ कई बरसों से
हर जगह ढूँढता फिरता है मुझे घर मेरा
हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा
मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समंदर मेरा
एक से हो गए मौसमों के चेहरे सारे
मेरी आँखों से कहीं खो गया मंज़र मेरा
किससे पूछूँ कि कहाँ गुम हूँ कई बरसों से
हर जगह ढूँढता फिरता है मुझे घर मेरा
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Saturday, November 20, 2010
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी
Singer: Ustad Nusrat Fateh Ali Khan
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी
दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी
बात वो आधी रात की रात वो पूरे चाँद की
चाँद भी ऐन चेत का उस पे तेरा जमाल भी
सब से नज़र बचा के वो मुझको था ऐसे देखता
एक दफ़ा तो रुक गई गर्दिश-ए-माह-ओ-साल भी
उसको न पा सके थे जब दिल का अजीब हाल था
अब जो पलट के देखते बात थी कुछ मुहाल भी
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी
दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी
बात वो आधी रात की रात वो पूरे चाँद की
चाँद भी ऐन चेत का उस पे तेरा जमाल भी
सब से नज़र बचा के वो मुझको कुछ ऐसे देखता
एक दफ़ा तो रुक गई गर्दिश-ए-माह-ओ-साल भी
दिल तो चमक सकेगा क्या फिर भी तरश के देख लें
शीशागरान-ए-शहर के हाथ का ये कमाल भी
उसको न पा सके थे जब दिल का अजीब हाल था
अब जो पलट के देखिये बात थी कुछ मुहाल भी
मेरी तलब था एक शख़्स वो जो नहीं मिला तो फिर
हाथ दुआ से यूँ गिरा भूल गया सवाल भी
शाम की नासमझ हवा पूछ रही है इक पता
मौज-ए-हवा-ए-कू-ए-यार कुछ तो मेरा ख़याल भी
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी
दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी
बात वो आधी रात की रात वो पूरे चाँद की
चाँद भी ऐन चेत का उस पे तेरा जमाल भी
सब से नज़र बचा के वो मुझको था ऐसे देखता
एक दफ़ा तो रुक गई गर्दिश-ए-माह-ओ-साल भी
उसको न पा सके थे जब दिल का अजीब हाल था
अब जो पलट के देखते बात थी कुछ मुहाल भी
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी
दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी
बात वो आधी रात की रात वो पूरे चाँद की
चाँद भी ऐन चेत का उस पे तेरा जमाल भी
सब से नज़र बचा के वो मुझको कुछ ऐसे देखता
एक दफ़ा तो रुक गई गर्दिश-ए-माह-ओ-साल भी
दिल तो चमक सकेगा क्या फिर भी तरश के देख लें
शीशागरान-ए-शहर के हाथ का ये कमाल भी
उसको न पा सके थे जब दिल का अजीब हाल था
अब जो पलट के देखिये बात थी कुछ मुहाल भी
मेरी तलब था एक शख़्स वो जो नहीं मिला तो फिर
हाथ दुआ से यूँ गिरा भूल गया सवाल भी
शाम की नासमझ हवा पूछ रही है इक पता
मौज-ए-हवा-ए-कू-ए-यार कुछ तो मेरा ख़याल भी
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टूटी है मेरी नींद मगर तुमको इससे क्या
Singer: Tasawur Khanum
टूटी है मेरी नींद मगर तुमको इससे क्या
बजते रहें हवाओं से दर, तुमको इससे क्या
तुम मौज-मौज मिसल-ए-सबा घूमते रहो
कट जाए मेरी सोच के पर, तुमको इससे क्या
औरों का हाथ थामो उन्हें रास्ता दिखाओ
मैं भूल जाऊँ अपना ही घर, तुमको इससे क्या
तुमने तो थक के दश्त में ख़ेमे लगा लिए
तनहा कटे किसी का सफ़र, तुमको इससे क्या
टूटी है मेरी नींद मगर तुमको इससे क्या
बजते रहें हवाओं से दर, तुमको इससे क्या
तुम मौज-मौज मिसल-ए-सबा घूमते रहो
कट जाए मेरी सोच के पर, तुमको इससे क्या
औरों का हाथ थामो उन्हें रास्ता दिखाओ
मैं भूल जाऊँ अपना ही घर, तुमको इससे क्या
तुमने तो थक के दश्त में ख़ेमे लगा लिए
तनहा कटे किसी का सफ़र, तुमको इससे क्या
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Wednesday, November 3, 2010
कभी आँसू कभी ख़ुशबू कभी नग़मा बनकर
Singers: Sadhana Sargam and Pankaj Udhas
कभी आँसू कभी ख़ुशबू कभी नग़मा बनकर
हम से हर शाम मिली है तेरा चेहरा बनकर
मेरी जागी हुई रातों को उसी की है तलाश
सो रहा है मेरी आँखों में जो सपना बनकर
रात भी आए तो बुझती नहीं चेहरे की चमक
रूह में फैल गया है वो उजाला बनकर
धूप में खो गया वो हाथ छुड़ाकर राशिद
घर से जो साथ चला था मेरा साया बनकर
कभी आँसू कभी ख़ुशबू कभी नग़मा बनकर
हम से हर शाम मिली है तेरा चेहरा बनकर
मेरी जागी हुई रातों को उसी की है तलाश
सो रहा है मेरी आँखों में जो सपना बनकर
रात भी आए तो बुझती नहीं चेहरे की चमक
रूह में फैल गया है वो उजाला बनकर
धूप में खो गया वो हाथ छुड़ाकर राशिद
घर से जो साथ चला था मेरा साया बनकर
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Sunday, October 31, 2010
ए इश्क हमें बरबाद ना कर
Singer: Nayyara Noor
ए इश्क़ हमें बरबाद ना कर, बरबाद ना कर
ए इश्क़ हमें बरबाद ना कर, बरबाद ना कर
ए इश्क़ न छेड़ आके हमें, हम भूले हुओं को याद ना कर
पहेले ही बहुत नाशाद हैं हम, तू और हमें नाशाद ना कर
किस्मत का सितम ही कम नही कुछ, यह ताज़ा सितम ईजाद ना कर
यूं ज़ुल्म ना कर, बेदाद ना कर
रातों को उठ-उठकर रोते हैं, रो रो के दुआएं करतें हैं
आंखों में तसव्वुर, दिल में ख़लिश, सर धुनते हैं आहें भरते हैं
ए इश्क यह कैसे रोग लगा, जीतें हैं ना ज़ालिम मरते हैं
इन ख्वाबों से यूं आज़ाद ना कर
जिस दिन से बंधा है ध्यान तेरा, घबरायें हुए से रहेते हैं
हर वक़्त तसव्वुर कर करके, शरमाये हुए से रेहेते हैं
कुम्हलाये हुए फूलों की तरह, कुम्हलाये हुए से रेहेते हैं
पामाल ना कर, बेदाद ना कर
ए इश्क़ हमें बरबाद ना कर, बरबाद ना कर
ए इश्क़ हमें बरबाद ना कर, बरबाद ना कर
ए इश्क़ न छेड़ आके हमें, हम भूले हुओं को याद ना कर
पहेले ही बहुत नाशाद हैं हम, तू और हमें नाशाद ना कर
किस्मत का सितम ही कम नही कुछ, यह ताज़ा सितम ईजाद ना कर
यूं ज़ुल्म ना कर, बेदाद ना कर
रातों को उठ-उठकर रोते हैं, रो रो के दुआएं करतें हैं
आंखों में तसव्वुर, दिल में ख़लिश, सर धुनते हैं आहें भरते हैं
ए इश्क यह कैसे रोग लगा, जीतें हैं ना ज़ालिम मरते हैं
इन ख्वाबों से यूं आज़ाद ना कर
जिस दिन से बंधा है ध्यान तेरा, घबरायें हुए से रहेते हैं
हर वक़्त तसव्वुर कर करके, शरमाये हुए से रेहेते हैं
कुम्हलाये हुए फूलों की तरह, कुम्हलाये हुए से रेहेते हैं
पामाल ना कर, बेदाद ना कर
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चाँद तनहा है, आस्माँ तनहा
Singer: Meena Kumari
चाँद तनहा है, आस्माँ तनहा
दिल मिला है कहाँ कहाँ तनहा
बुझ गई आस, छुप गया तारा
थरथराता रहा धुआँ तनहा
ज़िंदगी क्या इसी को कहते हैं
जिस्म तनहा है और जाँ तनहा
हमसफ़र कोई ग़र मिले भी कहीं
दोनों चलते रहे तनहा-तनहा
जलती बुझती सी रोशनी के परे
सिमटा-सिमटा सा एक मकां तनहा
राह देखा करेगा सदियों तक
छोड़ जाएंगे ये जहाँ तनहा
चाँद तनहा है, आस्माँ तनहा
दिल मिला है कहाँ कहाँ तनहा
बुझ गई आस, छुप गया तारा
थरथराता रहा धुआँ तनहा
ज़िंदगी क्या इसी को कहते हैं
जिस्म तनहा है और जाँ तनहा
हमसफ़र कोई ग़र मिले भी कहीं
दोनों चलते रहे तनहा-तनहा
जलती बुझती सी रोशनी के परे
सिमटा-सिमटा सा एक मकां तनहा
राह देखा करेगा सदियों तक
छोड़ जाएंगे ये जहाँ तनहा
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बेवफ़ा यूँ तेरा मुस्कुराना
Singer: Mitali Singh
बेवफ़ा यूँ तेरा मुस्कुराना
याद आने के क़ाबिल नहीं है
इस तरह ज़ुल्म ढाएँ हैं तूने
सर उठाने के क़ाबिल नहीं है
मैंने खत लिख के उनको बुलाया
आके क़ासिद ने दुखड़ा सुनाया
उनके पैरों में मेहंदी लगी है
आने जाने के क़ाबिल नहीं है
मैंने फोन करके उनको बुलाया
उनकी मम्मी ने आके उठाया
उनके हाथों में मेहंदी लगी है
फोन उठाने के क़ाबिल नहीं है
मैंने पूछा के कल शब कहाँ थे
पहले शरमाये फिर हँस के बोले
आप वो बात क्यों पूछते हो
जो बताने के क़ाबिल नहीं है
बेवफ़ा यूँ तेरा मुस्कुराना
याद आने के क़ाबिल नहीं है
इस तरह ज़ुल्म ढाएँ हैं तूने
सर उठाने के क़ाबिल नहीं है
मैंने खत लिख के उनको बुलाया
आके क़ासिद ने दुखड़ा सुनाया
उनके पैरों में मेहंदी लगी है
आने जाने के क़ाबिल नहीं है
मैंने फोन करके उनको बुलाया
उनकी मम्मी ने आके उठाया
उनके हाथों में मेहंदी लगी है
फोन उठाने के क़ाबिल नहीं है
मैंने पूछा के कल शब कहाँ थे
पहले शरमाये फिर हँस के बोले
आप वो बात क्यों पूछते हो
जो बताने के क़ाबिल नहीं है
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ऐ हुस्न-ए-बेपरवाह तुझे
Singer: Ghulam Ali
ऐ हुस्न-ए-बेपरवाह तुझे शबनम कहूँ शोला कहूँ
फूलों में भी शोख़ी तो है किसको मगर तुझसा कहूँ
गेसू उड़े महकी फ़ज़ा जादू करें आँखें तेरी
सोया हुआ मंज़र कहूँ या जागता सपना कहूँ
चंदा की तू है चाँदनी लहरों की तू है रागिनी
जान-ए-तमन्ना मैं तुझे क्या क्या कहूँ क्या ना कहूँ
ऐ हुस्न-ए-बेपरवाह तुझे शबनम कहूँ शोला कहूँ
फूलों में भी शोख़ी तो है किसको मगर तुझसा कहूँ
गेसू उड़े महकी फ़ज़ा जादू करें आँखें तेरी
सोया हुआ मंज़र कहूँ या जागता सपना कहूँ
चंदा की तू है चाँदनी लहरों की तू है रागिनी
जान-ए-तमन्ना मैं तुझे क्या क्या कहूँ क्या ना कहूँ
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वो नही मिला तो मलाल क्या
Singer: Jagjit Singh
वो नहीं मिला तो मलाल क्या, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
उसे याद करके ना दिल दुखा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
ना गिला किया ना ख़फा हुए, यूँ ही रास्ते में जुदा हुए
ना तू बेवफा ना मैं बेवफा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
तुझे एतबार-ओ-य़कीन नहीं, नहीं दुनिया इतनी बुरी नहीं
ना मलाल कर, मेरे साथ आ, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
वो वफाऐं थीं कि जफाऐं थीं, ये ना सोच किस की खताऐं थीं
वो तेरा है, उसको गले लगा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
वो नहीं मिला तो मलाल क्या, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
उसे याद करके ना दिल दुखा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
ना गिला किया ना ख़फा हुए, यूँ ही रास्ते में जुदा हुए
ना तू बेवफा ना मैं बेवफा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
तुझे एतबार-ओ-य़कीन नहीं, नहीं दुनिया इतनी बुरी नहीं
ना मलाल कर, मेरे साथ आ, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
वो वफाऐं थीं कि जफाऐं थीं, ये ना सोच किस की खताऐं थीं
वो तेरा है, उसको गले लगा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
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आज जाने की ज़िद ना करो
Singer: Farida Khanum
आज जाने की ज़िद ना करो
यूँ ही पेहलु में बैठे रहो
आज जाने की ज़िद न करो
हाय मर जायेंगे, हम तो लुट जायेंगे
ऐसी बातें किया ना करो
आज जाने की ज़िद ना करो
तुम ही सोचो ज़रा, क्यों ना रोके तुम्हें
जान जाती है, जब उठ के जाते हो तुम
तुमको अपनी कसम जान-ए-जां
बात इतनी मेरी मान लो
आज जाने की ज़िद ना करो
वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी है मगर
चन्द घड़ियाँ यही हैं जो आज़ाद हैं
इनको खोकर मेरे जान-ए-जां
उम्र भर ना तरसते रहो
आज जाने की ज़िद ना करो
कितना मासूम और रंगीन है ये समा
हुस्न और इश्क की आज मेराज है
कल की किस को खबर जान-ए-जां
रोक लो आज की रात को
आज जाने की ज़िद ना करो
यूँ ही पेहलु में बैठे रहो (२)
आज जाने की ज़िद ना करो
आज जाने की ज़िद ना करो
यूँ ही पेहलु में बैठे रहो
आज जाने की ज़िद न करो
हाय मर जायेंगे, हम तो लुट जायेंगे
ऐसी बातें किया ना करो
आज जाने की ज़िद ना करो
तुम ही सोचो ज़रा, क्यों ना रोके तुम्हें
जान जाती है, जब उठ के जाते हो तुम
तुमको अपनी कसम जान-ए-जां
बात इतनी मेरी मान लो
आज जाने की ज़िद ना करो
वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी है मगर
चन्द घड़ियाँ यही हैं जो आज़ाद हैं
इनको खोकर मेरे जान-ए-जां
उम्र भर ना तरसते रहो
आज जाने की ज़िद ना करो
कितना मासूम और रंगीन है ये समा
हुस्न और इश्क की आज मेराज है
कल की किस को खबर जान-ए-जां
रोक लो आज की रात को
आज जाने की ज़िद ना करो
यूँ ही पेहलु में बैठे रहो (२)
आज जाने की ज़िद ना करो
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Sunday, October 24, 2010
इक दिया दिल में जलाना भी बुझा भी देना
Singer: Ghulam Ali
इक दिया दिल में जलाना भी बुझा भी देना
याद करना भी उसे रोज़ भुला भी देना
क्या कहूँ यह मेरी चाहत है के नफरत उसकी
नाम लिखना भी मेरा लिख के मिटा भी देना
खत भी लिखना उसे मायूस भी रहना उससे
जुर्म करना भी मगर खुद को सज़ा भी देना
उससे मनसूब भी कर लेना पुराने किस्से
उसके बालों में नया फूल सजा भी देना
इक दिया दिल में जलाना भी बुझा भी देना
याद करना भी उसे रोज़ भुला भी देना
क्या कहूँ यह मेरी चाहत है के नफरत उसकी
नाम लिखना भी मेरा लिख के मिटा भी देना
खत भी लिखना उसे मायूस भी रहना उससे
जुर्म करना भी मगर खुद को सज़ा भी देना
उससे मनसूब भी कर लेना पुराने किस्से
उसके बालों में नया फूल सजा भी देना
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Sunday, October 17, 2010
उल्फ़त की नयी मंज़िल को चला
Singer: Iqbal Bano
उल्फ़त की नयी मंज़िल को चला तू बाहें डाल के बाहों में
दिल तोड़ने वाले देख के चल, हम भी तो पड़े हैं राहों में
क्या-क्या न जफ़ाएं दिल पे सहीं, पर तुमसे कोई शिक़वा न किया
इस जुर्म को भी शामिल कर लो मेरे मासूम ग़ुनाहों में
जब चांदनी रातों में तूने, ख़ुद हम से किया इक़रार-ए-वफ़ा
फिर आज हैं क्यों हम बेगाने, तेरी बे-रहम निग़ाहों में
हम भी हैं वही तुम भी हो वही ये अपनी-अपनी क़िस्मत है
तुम खेल रहे हो खुशियों से, हम डूब गये हैं आहों में
उल्फ़त की नयी मंज़िल को चला तू बाहें डाल के बाहों में
दिल तोड़ने वाले देख के चल, हम भी तो पड़े हैं राहों में
क्या-क्या न जफ़ाएं दिल पे सहीं, पर तुमसे कोई शिक़वा न किया
इस जुर्म को भी शामिल कर लो मेरे मासूम ग़ुनाहों में
जब चांदनी रातों में तूने, ख़ुद हम से किया इक़रार-ए-वफ़ा
फिर आज हैं क्यों हम बेगाने, तेरी बे-रहम निग़ाहों में
हम भी हैं वही तुम भी हो वही ये अपनी-अपनी क़िस्मत है
तुम खेल रहे हो खुशियों से, हम डूब गये हैं आहों में
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रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ
Singer: Runa Laila
रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ
पहले से मरासिम न सही फिर भी कभी तो
रस्म-ओ-रह-ए-दुनिया ही निभाने के लिए आ
किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ
कुछ तो मेरे पिन्दार-ए-मुहब्बत का भरम रख
तू भी तो कभी मुझ को मनाने के लिए आ
एक उम्र से हूँ लज़्ज़त-ए-गिरिया से भी महरूम
ऐ राहत-ए-जाँ मुझ को रुलाने के लिए आ
रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ
पहले से मरासिम न सही फिर भी कभी तो
रस्म-ओ-रह-ए-दुनिया ही निभाने के लिए आ
किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ
कुछ तो मेरे पिन्दार-ए-मुहब्बत का भरम रख
तू भी तो कभी मुझ को मनाने के लिए आ
एक उम्र से हूँ लज़्ज़त-ए-गिरिया से भी महरूम
ऐ राहत-ए-जाँ मुझ को रुलाने के लिए आ
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